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Dehradun News: Kidney Scandal Accused Akshay Raut Arrested From Assam – उत्तराखंड: 2017 में ह़ुए किडनी कांड का आरोपी एमबीबीएस डॉक्टर अक्षय राउत गिरफ्तार, नाम बदलकर कर रहा था प्रैक्टिस

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इस मामले को उस समय लालतप्पड़ चौकी प्रभारी भुवन पुजारी ने पकड़ा था। आरोपी अस्पताल की आड़ में लोगों को लालच देकर किडनी निकाल लेते थे।

उत्तराखंड के लालतप्पड़ में किडनी कांड का आरोपी और मास्टरमाइंड के बेटे डॉ. अक्षय राउत को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। चार सालों से वह देश के विभिन्न शहरों में नाम बदलकर अलग-अलग अस्पतालों में प्रैक्टिस कर रहा था। वर्तमान में वह असम के दिसपुर में एक अस्पताल में काम कर रहा था। आरोपी पर 20 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था। इस मामले में इससे पहले 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

डीआईजी/एसएसपी जन्मेजय खंडूडी ने बताया कि मामला 11 सितंबर 2017 को डोईवाला की लालतप्पड़ चौकी क्षेत्र में सामने आया था। उस दिन सप्तऋषि चौकी के पास चेकिंग के दौरान पुलिस ने पांच संदिग्धों को पकड़ा था। इन्होंने पुलिस को बताया था कि उनकी एयरपोर्ट के पास गंगोत्री अस्पताल में किडनी निकाली गई है। अब उन्हें दिल्ली ले जाया जा रहा है। इन लोगों ने डॉ. अमित राउत, डॉ. अक्षय राउत, डॉ. सुष्मा दास, डॉ. संजय दास, डॉ. जीवन राउत आदि पर आरोप लगाया था। इसके बाद उनके खिलाफ आईपीसी की धाराओं और मानव अंगों का प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत डोईवाला कोतवाली में दर्ज किया गया था।

मुकदमे की विवेचना तत्कालीन चौकी प्रभारी भुवन पुजारी को सौंपी गई। इस मामले में भुवन की टीम ने मुख्य आरोपी डॉ. अमित राउत, जीवन राउत, नर्स सरला सेमवाल को पंचकुला से गिरफ्तार कर लिया गया। इनके पास से लग्जरी गाड़ियां और 33 लाख रुपये बरामद हुए। वहां भी ये लोग अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट करने गए थे। मुख्य आरोपी ने पुलिस को बताया कि अक्षय भी उनके साथ आया था लेकिन वह भाग गया। अक्षय बीते चार सालों से फरार चल रहा था। उसके खिलाफ अदालत से गैर जमानती वारंट भी जारी किए गए। इस बीच पता चला कि अक्षय राउत असम के दिसपुर स्थित प्रिस्टन केयर सेंटर नाम के अस्पताल में प्रैक्टिस कर रहा है।

रायवाला थानाध्यक्ष भुवन पुजारी ने पूरा मामला देखा था। इसलिए वहां से आई एक फोटो के आधार पर पुजारी ने उसके अक्षय राउत होने की पुष्टि की और गिरफ्तारी के लिए हवाई जहाज से रवाना हो गए। दो दिन पूर्व अक्षय राउत को गिरफ्तार कर लिया गया। उसे पांच दिन की ट्रांजिट रिमांड पर देहरादून लाया गया। यहां सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

11 सितंबर 2017 – जावेद खान

16 सितंबर 2017 – नर्स सरला सेमवाल, प्रमोद उर्फ बिल्लू

17 सितंबर 2017 – डॉ. अमित राउत, डॉ. जीवन राउत, अभिषेक शर्मा, जगदीश कुमार, राजीव चौधरी, अनुपमा चौधरी

21 सितंबर 2017 – डॉ. अशोक योगी

26 नवंबर 2017 – डॉ. संजय दास और डॉ. सुषमा कुमारी

30 सितंबर 2018 – चंदना गुड़िया

16 दिसंबर 2018 – सतेंद्र कुमार बालियान, अंकित बालियान, अरुण कुमार पांडेय और श्रीवानसन चौधरी

दो चार्जशीट हुई मुकदमे में दाखिल
इस मुकदमे में पुलिस ने दो चार्जशीट दाखिल की हैं। इनमें पहली चार्जशीट नौ दिसंबर 2017 को दाखिल की गई। जबकि इसका अगला हिस्सा इसके बाद गिरफ्तार हुए आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट के रूप में दाखिल हुआ। यह चार्जशीट पुलिस ने एक साल बाद 17 दिसंबर 2018 को दाखिल की। मुकदमे का ट्रायल फिलहाल न्यायालय में चल रहा है।

छह महीनों से ज्यादा नहीं रुकता था एक जगह पर
आरोपी चार सालों से फरार चल रहा था। इस बीच पुलिस मुख्यालय ने उस पर 20 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया था। इस बीच आरोपी देश के विभिन्न शहरों में रुका। इनमें कोलकाता, गुड़गांव, बेंगलूरू, दिसपुर, दिल्ली आदि शामिल हैं। किसी भी शहर में वह छह महीने से ज्यादा नहीं रुका। उसने अपना नाम कभी संतोष बताया तो कभी बॉबी। वर्तमान में वह रिचर्ड अब्राहम लारेंस बनकर दिसपुर में रह रहा था।

डिग्री फर्जी दिखाई तो बढ़ेंगी धाराएं
आरोपी ने महाराष्ट्र से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी लेकिन यह हर जगह पर अस्पतालों में ही प्रैक्टिस करता था। ऐसे में एक संभावना यह भी है वह नाम के साथ-साथ अपनी डिग्री भी फर्जी दिखाता हो। यही नहीं वह वहां पर सामान्य प्रैक्टिस कर रहा था या किडनी प्रत्यारोपण में ही व्यस्त था। इस बात की भी जांच चल रही है। यदि सब बातें सही निकली तो उसके खिलाफ अन्य धाराएं भी जोड़ी जाएंगी।

लालतप्पड़ के गंगोत्री अस्पताल में इस गैंग ने 40 से ज्यादा लोगों की किडनी निकाली थी। ज्यादातर लोग कोलकाता से यहां लाए जाते थे। इसके लिए इस गैंग के एजेंट देशभर में फैले हुए थे। कोलकाता से गिरफ्तार मुख्य एजेंट चांदना गुड़िया नाम की महिला ने इस मामले से जुड़े कई खुुलासे किए थे।

अमित राउत इस गैंग का सरगना है। उसके बेटे अक्षय राउत ने 2001 में केएनआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी। अमित राउत आयुर्वेदिक डॉक्टर है जबकि अक्षय की मां होम्योपैथी डॉक्टर है। अक्षय का पिता अमित राउत किडनी ट्रांसप्लांट के अवैध धंधे में लंबे समय से लगा हुआ था। वर्ष 2012 तक अक्षय मुंबई के एक अस्पताल में प्रैक्टिस करता था। इसके बाद वह अपने पिता के साथ इस गोरखधंधे में जुड़ गया। अमित अपने गैंगे के साथ वर्ष 2017 में देहरादून के लालतप्पड़ में आ गया था।

यहां उन्होंने 40 से ज्यादा लोगों की किडनी निकाली थी। किडनी जिससे ली जाती थी उसे चंद हजार रुपये पकड़ा दिए जाते थे। इसके बाद यह लाखों करोड़ों रुपये में अलग-अलग लोगों को बेची जाती थी। किडनी ट्रांसप्लांट का काम भी इस गैंग के डॉक्टर करते थे। इनमें अक्षय राउत एक्सपर्ट माना जाता था। इनका यह गैंग एक बार नेपाल में भी पकड़ा गया था। नेपाल में अमित के भाई जीवन राउत को सीबीआई ने विदेशी मुद्रा के साथ पकड़ा था।

विस्तार

उत्तराखंड के लालतप्पड़ में किडनी कांड का आरोपी और मास्टरमाइंड के बेटे डॉ. अक्षय राउत को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। चार सालों से वह देश के विभिन्न शहरों में नाम बदलकर अलग-अलग अस्पतालों में प्रैक्टिस कर रहा था। वर्तमान में वह असम के दिसपुर में एक अस्पताल में काम कर रहा था। आरोपी पर 20 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था। इस मामले में इससे पहले 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

डीआईजी/एसएसपी जन्मेजय खंडूडी ने बताया कि मामला 11 सितंबर 2017 को डोईवाला की लालतप्पड़ चौकी क्षेत्र में सामने आया था। उस दिन सप्तऋषि चौकी के पास चेकिंग के दौरान पुलिस ने पांच संदिग्धों को पकड़ा था। इन्होंने पुलिस को बताया था कि उनकी एयरपोर्ट के पास गंगोत्री अस्पताल में किडनी निकाली गई है। अब उन्हें दिल्ली ले जाया जा रहा है। इन लोगों ने डॉ. अमित राउत, डॉ. अक्षय राउत, डॉ. सुष्मा दास, डॉ. संजय दास, डॉ. जीवन राउत आदि पर आरोप लगाया था। इसके बाद उनके खिलाफ आईपीसी की धाराओं और मानव अंगों का प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत डोईवाला कोतवाली में दर्ज किया गया था।

मुकदमे की विवेचना तत्कालीन चौकी प्रभारी भुवन पुजारी को सौंपी गई। इस मामले में भुवन की टीम ने मुख्य आरोपी डॉ. अमित राउत, जीवन राउत, नर्स सरला सेमवाल को पंचकुला से गिरफ्तार कर लिया गया। इनके पास से लग्जरी गाड़ियां और 33 लाख रुपये बरामद हुए। वहां भी ये लोग अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट करने गए थे। मुख्य आरोपी ने पुलिस को बताया कि अक्षय भी उनके साथ आया था लेकिन वह भाग गया। अक्षय बीते चार सालों से फरार चल रहा था। उसके खिलाफ अदालत से गैर जमानती वारंट भी जारी किए गए। इस बीच पता चला कि अक्षय राउत असम के दिसपुर स्थित प्रिस्टन केयर सेंटर नाम के अस्पताल में प्रैक्टिस कर रहा है।

रायवाला थानाध्यक्ष भुवन पुजारी ने पूरा मामला देखा था। इसलिए वहां से आई एक फोटो के आधार पर पुजारी ने उसके अक्षय राउत होने की पुष्टि की और गिरफ्तारी के लिए हवाई जहाज से रवाना हो गए। दो दिन पूर्व अक्षय राउत को गिरफ्तार कर लिया गया। उसे पांच दिन की ट्रांजिट रिमांड पर देहरादून लाया गया। यहां सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

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