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Farm Laws Repeal: Aap Leader Colonel Ajay Kothiyal Put Question On Bjp – कृषि कानून होंगे वापस: आप नेता कर्नल कोठियाल बोले- किसानों की ताकत ने दिखाया सरकारें झुकती हैं

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Farm Laws Repeal: आप पार्टी ने केंद्र सरकार से आंदोलन में मारे गए किसानों को शहादत का दर्जा, एक करोड़ की आर्थिक सहायता व परिजनों को नौकरी देने की मांग की है।

आम आदमी पार्टी के नेता कर्नल अजय कोठियाल ने कहा कि देश के किसानों की ताकत ने दिखा दिया कि सरकारें झुकती हैं, बस झुकाने वाला चाहिए। कहा कि आगामी चुनावों में हार को देखते हुए केंद्र सरकार ने तीनों काले कृषि बिलों को वापस लेने की घोषणा कर दी है। यह देश के किसानों की बड़ी जीत है। एक वर्ष से अधिक समय से चल रहे किसानों के संघर्ष ने खेती किसानी को बचाया है।

कृषि कानून होंगे वापस: पीएम मोदी के एलान के बाद उत्तराखंड में खुशी से झूमे किसान, मिठाई बांटकर की आतिशबाजी, तस्वीरें

कोठियाल ने कहा कि आज का दिन भारत के इतिहास में 15 अगस्त और 26 जनवरी की तरह लिखा जाएगा। लोकतंत्र की जीत हुई है। किसानों ने सभी सरकारों को बता दिया कि जनतंत्र में सिर्फ जनता ही मालिक होती है। देश के किसानों का आंदोलन पूरी दुनिया के लिए एक सफल अहिंसक आंदोलन का सबूत है। पूरी दुनिया में इतना बड़ा और लंबा आंदोलन शायद ही कभी हुआ होगा।

उन्होंने कहा कि तीनों काले कृषि बिलों को लेकर आंदोलन में 700 से ज्यादा किसानों की जान चली गई। केंद्र सरकार पहले ही ये कानून वापस ले लेती तो उन किसानों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि अब सरकार को उन 700 से ज्यादा किसानों को शहीद का दर्जा देना चाहिए। साथ ही आश्रितों को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता के साथ सरकारी नौकरी देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश याद रखेगा की कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल के आंदोलन के दौरान किसानों को आतंकी, खालिस्तानी, आंदोलन परजीवी, दलाल जैसी कई संज्ञाए दी गईं। कृषि बिलों को सही साबित करने के लिए कई तरह के तर्क दिए गए, लेकिन चुनावों में अपनी हार देखकर तीनों काले कानून को वापस लेने की घोषणा की गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कृषि कानूनों को वापस लेने के ऐलान पर भाजपा ने कहा कि पीएम ने बड़ा दिल दिखाया। अचानक लिए गए गए इस फैसले पर कांग्रेस ने यह कहकर तंज किया कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं, इसलिए केंद्र सरकार ने बिल वापस लेने का फैसला लिया।

हालांकि प्रदेश भाजपा की ओर से कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के केंद्र के निर्णय पर कोई अधिकृत बयान नहीं आया, लेकिन पार्टी ने प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम का एक वीडियो बयान जारी किया। इस बयान में गौतम ने कहा कि कृषि बिल किसानों के हित में हैं। लेकिन हम किसानों को यह समझाने में असमर्थ रहे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने भी खुद को प्रभारी के बयान से संबद्ध किया।

केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा लाइन ऑफ एक्शन
पार्टी नेताओं को अभी कुछ सूझ नहीं रहा है कि वे केंद्र के रुख के बाद क्या लाइन पकड़ें। दिन भर संगठन और सरकार के लोगों की कृषि बिलों पर प्रतिक्रिया का इंतजार होता रहा। लेकिन कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई। सूत्रों ने बताया कि कृषि कानूनों पर केंद्रीय नेतृत्व के बयानों की लाइन तय होने के बाद पार्टी नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। तात्कालिक प्रतिक्रिया दिए जाने पर पार्टी को आशंका है कि हर नेता अपने विवेक से बयान देगा तो उसमें विरोधाभास हो सकता है। केंद्र से लेकर राज्य तक भाजपा नेताओं के बयानों में एकरूपता होनी चाहिए।

भाजपा के लिए राहत भी आफत भी
प्रधानमंत्री के कृषि कानून वापस लिए जाने के ऐलान से उत्तराखंड भाजपा को राहत तो मिली है, लेकिन पिछले कई महीनों से कानून के पक्ष में तर्क दे रहे भाजपा नेताओं के लिए आफत वाली बात यह है कि अब कानून वापसी पर अपने तर्कों की क्या लाइन रखें। दरअसल कृषि कानून के विरोध में आंदोलन का असर उत्तराखंड की तराई में देखा गया। इसके बावजूद केंद्रीय नेतृत्व के कानून के पक्ष में मजबूती से खड़े रहने के कारण प्रदेश सरकार के मंत्रियों और भाजपा नेताओं को ढाल बनना पड़ा। किसानों की नाराजगी को दूर करने के लिए प्रदेश स्तर पर सत्तारूढ़ दल ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। सरकार और संगठन के स्तर पर किसान हित में कई फैसले लिए। लेकिन ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, हरिद्वार और देहरादून में किसानों की नाराजगी खबरों से सत्तारूढ़ दल की पेशानी पर बल पड़ते गए। ऊधम सिंह नगर में किसानों की नाराजगी को भांपकर धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे यशपाल आर्य ने कांग्रेस में घरवापसी कर ली। भाजपा समर्थकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पूर्व कृषि कानूनों की वापसी से किसानों की नाराजगी दूर हो सकती है। इससे भाजपा तीन मैदानी जिलों में चुनावी नुकसान को कम कर सकती है।

भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम ने पीएम नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कृषि कानून लाए गए ताकि किसान अपनी उपज को पूरे देश में कहीं भी बेच सकें और व्यापारी की तरह जी सकें। जैसा कि पीएम ने कहा कि हम किसानों को समझाने में असमर्थ रहे। किसानों को ऐसा लगता है तो उन्होंने बिल वापस लिए हैं। बकौल गौतम, मैं उनका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। कृषक अपने खेतों में जाएं। अपने कार्य को देश हित में गति दें। प्रधानमंत्री का बहुत बड़ा निर्णय है, जो जनता को समर्पित है।

किसानों को धरना समाप्त कर नियमित कामों में लगना चाहिए : बंसल
राज्य सभा सांसद नरेश बंसल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव पर तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा पर सभी किसान संगठनों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का आभार प्रकट करना चाहिए और अब धरने को समाप्त कर देना चाहिए। उन्हें अपने नियमित कामों में लगना चाहिए। विपक्ष बस गुमराह करने का काम कर रहा है व राजनीतिक लाभ के लिए काम कर रहा है पर जनता सब देख रही है।

जाने-अंजाने में किसान कृषि कानून को नहीं समझ पाए : त्रिवेंद्र
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि यह राजनीति का स्वभाव है, ऐसे निर्णयों में सब श्रेय लेने की कोशिश करते हैं। सब जानते हैं कि जिसने कृषि कानून बनाया, वही उसको वापस ले सकते थे। आज उसको वापस लिया गया है। किसान लंबे समय से आंदोलनरत थे। मैं समझता हूं कि जाने-अंजाने में किसान कानून को नहीं समझ पाए। प्रधानमंत्री ने उन किसानों की भावनाओं का सम्मान किया है।

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आम आदमी पार्टी के नेता कर्नल अजय कोठियाल ने कहा कि देश के किसानों की ताकत ने दिखा दिया कि सरकारें झुकती हैं, बस झुकाने वाला चाहिए। कहा कि आगामी चुनावों में हार को देखते हुए केंद्र सरकार ने तीनों काले कृषि बिलों को वापस लेने की घोषणा कर दी है। यह देश के किसानों की बड़ी जीत है। एक वर्ष से अधिक समय से चल रहे किसानों के संघर्ष ने खेती किसानी को बचाया है।

कृषि कानून होंगे वापस: पीएम मोदी के एलान के बाद उत्तराखंड में खुशी से झूमे किसान, मिठाई बांटकर की आतिशबाजी, तस्वीरें

कोठियाल ने कहा कि आज का दिन भारत के इतिहास में 15 अगस्त और 26 जनवरी की तरह लिखा जाएगा। लोकतंत्र की जीत हुई है। किसानों ने सभी सरकारों को बता दिया कि जनतंत्र में सिर्फ जनता ही मालिक होती है। देश के किसानों का आंदोलन पूरी दुनिया के लिए एक सफल अहिंसक आंदोलन का सबूत है। पूरी दुनिया में इतना बड़ा और लंबा आंदोलन शायद ही कभी हुआ होगा।

उन्होंने कहा कि तीनों काले कृषि बिलों को लेकर आंदोलन में 700 से ज्यादा किसानों की जान चली गई। केंद्र सरकार पहले ही ये कानून वापस ले लेती तो उन किसानों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि अब सरकार को उन 700 से ज्यादा किसानों को शहीद का दर्जा देना चाहिए। साथ ही आश्रितों को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता के साथ सरकारी नौकरी देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश याद रखेगा की कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल के आंदोलन के दौरान किसानों को आतंकी, खालिस्तानी, आंदोलन परजीवी, दलाल जैसी कई संज्ञाए दी गईं। कृषि बिलों को सही साबित करने के लिए कई तरह के तर्क दिए गए, लेकिन चुनावों में अपनी हार देखकर तीनों काले कानून को वापस लेने की घोषणा की गई है।

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