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How Long Will The Reign Of The Infamous In The Jails Of Uttarakhand Last? – कब तक चलेगा उत्तराखंड की जेलों में कुख्यातों का राज

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उत्तराखंड की जेलें कुख्यातों का गढ़ बनती जा रही हैं। लगातार नेटवर्क को ध्वस्त करने के प्रयास भी हो रहे हैं, लेकिन सलाखों के पीछे कुख्यातों के राज को खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। बीते 10 माह के भीतर तीन जेलों में चार बार एसटीएफ ने छापे मारे हैं। इन छापों के बाद पता चला कि जेलों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी लचर है। यहां बेखौफ बदमाश मोबाइलों का प्रयोग कर अपने धंधे चला रहे हैं। कोई सुपारी ले रहा है तो कोई जेल में बैठकर नशे का धंधा चला रहा है।
प्रदेश की जेलों की सुरक्षा व अन्य व्यवस्थाओं को लेकर पिछले दिनों हाईकोर्ट भी फटकार लगा चुका है। हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि यहां की जेलों की हालत यूपी और बिहार की जेलों से भी बदतर हैं। यही बात ये छापे भी सिद्ध कर रहे हैं। आमतौर पर शांत आबोहवा के लिए जाना जाने वाले उत्तराखंड में बदमाश जेलों में बैठकर अपने मंसूबों को अंजाम देने में लगे हुए हैं। पिछले दिनों जेलों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हुई। बावजूद इसके कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला।
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न कैमरे न बंदी रक्षक
जेलों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है। सबसे बड़ी बात प्रदेश की किसी भी जेल में मोबाइल नेटवर्क जैमर काम नहीं करता है। तर्क कि अभी तक जेलों में जो जैमर लगे हुए हैं वह केवल थ्री जी सिग्नल को ही जाम कर सकते हैं। जबकि, वर्तमान में फोर जी नेटवर्क पर कॉल और डाटा कॉल होती हैं। यही नहीं अब पांचवी पीढ़ी के मोबाइल सिग्नल भी लांच होने जा रहे हैं। मगर, जेलों में इसकी अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है। यही नहीं लंबे समय से बंदी रक्षकों की कमी से भी जेलें जूझ रहीं हैं।
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इस साल हुई घटनाएं
01- हरिद्वार जेल से इंतजार उर्फ पहलवान ने मांगी थी रंगदारी
11 जनवरी 2021 को हरिद्वार जिला जेल में कुख्यात इंतजार उर्फ पहलवान ने अपने साथ जेल में बंद एक व्यवसायी को डरा धमकाकर दो सोने की चेन की मांग की थी। एसटीएफ ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर जेल में कार्रवाई की। वहां से मोबाइल फोन बरामद किए गए। एसटीएफ ने दो आरोपियों को सोने की चेन के साथ गिरफ्तार किया। इसके साथ ही इंतजार के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज किया गया।

02- अल्मोड़ा जेल में हुआ था बड़ा नेटवर्क ध्वस्त
08 अक्तूबर 2021 को अल्मोड़ा जेल में कार्रवाई हुई। अल्मोड़ा जेल में बंद बदमाश कलीम भी वहां से अपना नेटवर्क चला रहा था। कलीम ने हरिद्वार के एक कारोबारी को मारने की साजिश रची और शूटर बुलवाए। कलीम समेत कुल सात लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इसके साथ ही जेल के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच बैठी और उन्हें सस्पेंड किया गया। जेल से चार फोन भी बरामद हुए थे। जेल में बदमाश वहां के ड्राइवर के खाते में पैसे मंगाता था। इस घटना के बाद बदमाश कलीम को हरिद्वार जेल में शिफ्ट किया गया।

03- पौड़ी जेल से नरेंद्र वाल्मीकि कराना चाह रहा था तीन हत्याएं
एक नवंबर को एसटीएफ ने पौड़ी जेल में छापा मारा था। यहां भी मोबाइल बरामद हुए थे। पता चला कि हत्या के प्रयास में सजा काट रहा कुख्यात नरेंद्र वाल्मीकि तीन लोगों की हत्या कराना चाहता है। एसटीएफ ने देहरादून के क्लेमेंटटाउन थाना क्षेत्र से उसके सात शूटरों को गिरफ्तार किया था। जिन लोगों की हत्या करानी थी उनमें एक युवती भी शामिल थी। पुलिस ने उसकी हत्या की सुपारी देने वाले पिता को भी गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से भारी मात्रा में असलाह भी बरामद हुआ था। नरेंद्र वाल्मीकि को बाद में हरिद्वार जेल ट्रांसफर कर दिया गया था।
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अल्मोड़ा जेल में अधिकारियों पर भी हुई थी कार्रवाई
अक्तूबर में अल्मोड़ा जेल में कलीम के पकड़े जाने के बाद यहां पर अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। आईजी जेल ने कुछ अधिकारियों और बंदी रक्षकों को सस्पेंड भी किया था। लेकिन, एक माह बाद ही यहां इस तरह की दूसरी घटना सामने आई। ऐसे में अंदेशा यह भी जताया जा रहा है कि चंद पैसों के लालच में जेल के अधिकारी और कर्मचारी ही उनकी मदद कर रहे हैं। इसकी बाकायदा जांच भी हुई, लेकिन जांच का कोई नतीजा अभी तक सामने नहीं आया है।
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उत्तराखंड की जेलें कुख्यातों का गढ़ बनती जा रही हैं। लगातार नेटवर्क को ध्वस्त करने के प्रयास भी हो रहे हैं, लेकिन सलाखों के पीछे कुख्यातों के राज को खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। बीते 10 माह के भीतर तीन जेलों में चार बार एसटीएफ ने छापे मारे हैं। इन छापों के बाद पता चला कि जेलों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी लचर है। यहां बेखौफ बदमाश मोबाइलों का प्रयोग कर अपने धंधे चला रहे हैं। कोई सुपारी ले रहा है तो कोई जेल में बैठकर नशे का धंधा चला रहा है।

प्रदेश की जेलों की सुरक्षा व अन्य व्यवस्थाओं को लेकर पिछले दिनों हाईकोर्ट भी फटकार लगा चुका है। हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि यहां की जेलों की हालत यूपी और बिहार की जेलों से भी बदतर हैं। यही बात ये छापे भी सिद्ध कर रहे हैं। आमतौर पर शांत आबोहवा के लिए जाना जाने वाले उत्तराखंड में बदमाश जेलों में बैठकर अपने मंसूबों को अंजाम देने में लगे हुए हैं। पिछले दिनों जेलों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हुई। बावजूद इसके कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला।

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न कैमरे न बंदी रक्षक

जेलों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है। सबसे बड़ी बात प्रदेश की किसी भी जेल में मोबाइल नेटवर्क जैमर काम नहीं करता है। तर्क कि अभी तक जेलों में जो जैमर लगे हुए हैं वह केवल थ्री जी सिग्नल को ही जाम कर सकते हैं। जबकि, वर्तमान में फोर जी नेटवर्क पर कॉल और डाटा कॉल होती हैं। यही नहीं अब पांचवी पीढ़ी के मोबाइल सिग्नल भी लांच होने जा रहे हैं। मगर, जेलों में इसकी अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है। यही नहीं लंबे समय से बंदी रक्षकों की कमी से भी जेलें जूझ रहीं हैं।

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इस साल हुई घटनाएं

01- हरिद्वार जेल से इंतजार उर्फ पहलवान ने मांगी थी रंगदारी

11 जनवरी 2021 को हरिद्वार जिला जेल में कुख्यात इंतजार उर्फ पहलवान ने अपने साथ जेल में बंद एक व्यवसायी को डरा धमकाकर दो सोने की चेन की मांग की थी। एसटीएफ ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर जेल में कार्रवाई की। वहां से मोबाइल फोन बरामद किए गए। एसटीएफ ने दो आरोपियों को सोने की चेन के साथ गिरफ्तार किया। इसके साथ ही इंतजार के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज किया गया।

02- अल्मोड़ा जेल में हुआ था बड़ा नेटवर्क ध्वस्त

08 अक्तूबर 2021 को अल्मोड़ा जेल में कार्रवाई हुई। अल्मोड़ा जेल में बंद बदमाश कलीम भी वहां से अपना नेटवर्क चला रहा था। कलीम ने हरिद्वार के एक कारोबारी को मारने की साजिश रची और शूटर बुलवाए। कलीम समेत कुल सात लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इसके साथ ही जेल के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच बैठी और उन्हें सस्पेंड किया गया। जेल से चार फोन भी बरामद हुए थे। जेल में बदमाश वहां के ड्राइवर के खाते में पैसे मंगाता था। इस घटना के बाद बदमाश कलीम को हरिद्वार जेल में शिफ्ट किया गया।

03- पौड़ी जेल से नरेंद्र वाल्मीकि कराना चाह रहा था तीन हत्याएं

एक नवंबर को एसटीएफ ने पौड़ी जेल में छापा मारा था। यहां भी मोबाइल बरामद हुए थे। पता चला कि हत्या के प्रयास में सजा काट रहा कुख्यात नरेंद्र वाल्मीकि तीन लोगों की हत्या कराना चाहता है। एसटीएफ ने देहरादून के क्लेमेंटटाउन थाना क्षेत्र से उसके सात शूटरों को गिरफ्तार किया था। जिन लोगों की हत्या करानी थी उनमें एक युवती भी शामिल थी। पुलिस ने उसकी हत्या की सुपारी देने वाले पिता को भी गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से भारी मात्रा में असलाह भी बरामद हुआ था। नरेंद्र वाल्मीकि को बाद में हरिद्वार जेल ट्रांसफर कर दिया गया था।

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अल्मोड़ा जेल में अधिकारियों पर भी हुई थी कार्रवाई

अक्तूबर में अल्मोड़ा जेल में कलीम के पकड़े जाने के बाद यहां पर अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। आईजी जेल ने कुछ अधिकारियों और बंदी रक्षकों को सस्पेंड भी किया था। लेकिन, एक माह बाद ही यहां इस तरह की दूसरी घटना सामने आई। ऐसे में अंदेशा यह भी जताया जा रहा है कि चंद पैसों के लालच में जेल के अधिकारी और कर्मचारी ही उनकी मदद कर रहे हैं। इसकी बाकायदा जांच भी हुई, लेकिन जांच का कोई नतीजा अभी तक सामने नहीं आया है।

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