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Uttarakhand News: Letter Written To Officers In Name Of Cm Pro Went Viral, Read Full Details – उत्तराखंड: वाहनों का चालान निरस्त करने संबंधी पत्र सोशल मीडिया में वायरल, सीएम के पीआरओ हुए बर्खास्त

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मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी नंदन सिंह बिष्ट का कहना है कि पत्र किसी ने उनके कार्यालय से जारी किया है। लेटर हेड उनका ही है। पत्र में उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। नीचे नाम लिखा गया है।

खड़िया लदे वाहनों का चालान रद करने के लिए बागेश्वर के पुलिस कप्तान को संबोधित पत्र मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी नंदन सिंह बिष्ट को भारी पड़ गया। सोशल मीडिया में पत्र के वायरल होने और विपक्ष के सदन में सवाल उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिष्ट की पीआरओ पद से छुट्टी कर दी गई। बिष्ट पर गाज गिराने के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात सभी पीआरओ, मुख्य कोऑर्डिनेटर और कोऑर्डिनेटर पर लेटर हेड के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी गई। अब वे हस्ताक्षर से कोई सरकारी पत्र या निर्देश जारी नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) आनंद बर्द्धन ने निर्देश जारी कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी नंदन सिंह बिष्ट के लेटर हेड पर लिखा पत्र सोशल मीडिया में खूब वायरल हुआ। इस पत्र में मुख्यमंत्री के मौखिक आदेश के हवाले से बागेश्वर के पुलिस कप्तान को निर्देश दिए गए कि यातायात पुलिस ने तीन वाहनों का जो चालान किया है, उन्हें निरस्त कर दिया जाए। इस पत्र को लेकर विपक्ष ने सदन में खूब हंगामा काटा।

मामला संज्ञान में आते ही शनिवार सुबह ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख दिखाते हुए पीआरओ को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए। इतना ही नहीं उनके निर्देश पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने सभी पीआरओ, कोऑर्डिनेटरों और मुख्य कोऑर्डिनेटर को ताकीद किया कि वे लेटर हेड का प्रयोग नहीं करेंगे और अपने हस्ताक्षर से कोई सरकारी पत्र जारी नहीं करेंगे। अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन इस संबंध में कार्यालय आदेश जारी किए गए हैं।

चालान करने वाले इंस्पेक्टर को हटाए जाने पर सवाल

कांग्रेस ने चालान करने वाले इंसपेक्टर शिवराज सिंह को हटाए जाने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि शिवराज सिंह को लाइनहाजिर कर दिया गया।

पत्र की विश्वसनीयता की जांच होगी। यदि कोई सच्चाई पाई गई तो कठोरतम कार्रवाई होगी।– सुबोध उनियाल, शासकीय प्रवक्ता, उत्तराखंड

सोशल मीडिया से यह मामला संज्ञान में आया। हमें ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है। कोई चालान निरस्त नहीं किया गया। चालान पर कार्रवाई कर उसे आगे भेज दिया गया। चालान पर धनराशि का भुगतान की भी सूचना है। चालान करने वाले ट्रैफिक इंसपेक्टर(टीआई) को तीन दिसंबर को पुलिस लाइन में रिजर्व इंसपेक्टर (आरआई) बनाया गया। उन्होंने पारिवारिक कारणों से ट्रांसफर के लिए भी आवेदन कर रखा है। -अमित श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक, बागेश्वर

29 नवंबर को तीन खड़िया लदे वाहनों का चालान किया। तीन में से दो वाहन ऐसे निकले, जिनके स्कूल का उद्घाटन मुख्यमंत्री ने 27 नवंबर को किया था। वह भारतीय जनता युवा मोर्चा के बड़े नेता हैं। मेरी जानकारी में आया कि जिस ट्रैफिक इंसपेक्टर ने चालान किया था, उसे लाइन हाजिर किया गया है।- करन माहरा, उपनेता कांग्रेस विधानमंडल दल

सरकार ने विपक्ष के आरोपों की पुष्टि की: प्रीतम

नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि विपक्ष जो आरोप लगा रहा है, सरकार उसकी पुष्टि करने का काम कर रही है। पीआरओ को हटा दिया गया। लेकिन पीआरओ ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि मुख्यमंत्री ने उन्हें मौखिक आदेश दिया है। मुख्यमंत्री मौखिक आदेश दे रहे हैं तो पीआरओ तो उसका पालन करेगा ही। सरकार में जरा सी भी नैतिकता है तो मुख्यमंत्री इस्तीफा दें। उस इंसपेक्टर को भी हटा दिया गया, जिसने कानून का पालन किया है।

पत्र पर मेरे हस्ताक्षर नहीं, जांच करवा रहा हूं : बिष्ट

मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी नंदन सिंह बिष्ट का कहना है कि पत्र किसी ने उनके कार्यालय से जारी किया है। लेटर हेड उनका ही है। पत्र में उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। नीचे नाम लिखा गया है। उनका (नंदन सिंह का) न्यूरो का इलाज चल रहा है। पत्र गलत लिखा गया है, वह इसकी जांच करवा रहे हैं।

खड़िया लदे वाहनों का चालान रद करने के लिए बागेश्वर के पुलिस कप्तान को संबोधित पत्र मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी नंदन सिंह बिष्ट को भारी पड़ गया। सोशल मीडिया में पत्र के वायरल होने और विपक्ष के सदन में सवाल उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिष्ट की पीआरओ पद से छुट्टी कर दी गई। बिष्ट पर गाज गिराने के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात सभी पीआरओ, मुख्य कोऑर्डिनेटर और कोऑर्डिनेटर पर लेटर हेड के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी गई। अब वे हस्ताक्षर से कोई सरकारी पत्र या निर्देश जारी नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) आनंद बर्द्धन ने निर्देश जारी कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी नंदन सिंह बिष्ट के लेटर हेड पर लिखा पत्र सोशल मीडिया में खूब वायरल हुआ। इस पत्र में मुख्यमंत्री के मौखिक आदेश के हवाले से बागेश्वर के पुलिस कप्तान को निर्देश दिए गए कि यातायात पुलिस ने तीन वाहनों का जो चालान किया है, उन्हें निरस्त कर दिया जाए। इस पत्र को लेकर विपक्ष ने सदन में खूब हंगामा काटा।

मामला संज्ञान में आते ही शनिवार सुबह ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख दिखाते हुए पीआरओ को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए। इतना ही नहीं उनके निर्देश पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने सभी पीआरओ, कोऑर्डिनेटरों और मुख्य कोऑर्डिनेटर को ताकीद किया कि वे लेटर हेड का प्रयोग नहीं करेंगे और अपने हस्ताक्षर से कोई सरकारी पत्र जारी नहीं करेंगे। अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन इस संबंध में कार्यालय आदेश जारी किए गए हैं।

चालान करने वाले इंस्पेक्टर को हटाए जाने पर सवाल

कांग्रेस ने चालान करने वाले इंसपेक्टर शिवराज सिंह को हटाए जाने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि शिवराज सिंह को लाइनहाजिर कर दिया गया।

पत्र की विश्वसनीयता की जांच होगी। यदि कोई सच्चाई पाई गई तो कठोरतम कार्रवाई होगी।– सुबोध उनियाल, शासकीय प्रवक्ता, उत्तराखंड

सोशल मीडिया से यह मामला संज्ञान में आया। हमें ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है। कोई चालान निरस्त नहीं किया गया। चालान पर कार्रवाई कर उसे आगे भेज दिया गया। चालान पर धनराशि का भुगतान की भी सूचना है। चालान करने वाले ट्रैफिक इंसपेक्टर(टीआई) को तीन दिसंबर को पुलिस लाइन में रिजर्व इंसपेक्टर (आरआई) बनाया गया। उन्होंने पारिवारिक कारणों से ट्रांसफर के लिए भी आवेदन कर रखा है। -अमित श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक, बागेश्वर

29 नवंबर को तीन खड़िया लदे वाहनों का चालान किया। तीन में से दो वाहन ऐसे निकले, जिनके स्कूल का उद्घाटन मुख्यमंत्री ने 27 नवंबर को किया था। वह भारतीय जनता युवा मोर्चा के बड़े नेता हैं। मेरी जानकारी में आया कि जिस ट्रैफिक इंसपेक्टर ने चालान किया था, उसे लाइन हाजिर किया गया है।- करन माहरा, उपनेता कांग्रेस विधानमंडल दल

सरकार ने विपक्ष के आरोपों की पुष्टि की: प्रीतम

नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि विपक्ष जो आरोप लगा रहा है, सरकार उसकी पुष्टि करने का काम कर रही है। पीआरओ को हटा दिया गया। लेकिन पीआरओ ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि मुख्यमंत्री ने उन्हें मौखिक आदेश दिया है। मुख्यमंत्री मौखिक आदेश दे रहे हैं तो पीआरओ तो उसका पालन करेगा ही। सरकार में जरा सी भी नैतिकता है तो मुख्यमंत्री इस्तीफा दें। उस इंसपेक्टर को भी हटा दिया गया, जिसने कानून का पालन किया है।

पत्र पर मेरे हस्ताक्षर नहीं, जांच करवा रहा हूं : बिष्ट

मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी नंदन सिंह बिष्ट का कहना है कि पत्र किसी ने उनके कार्यालय से जारी किया है। लेटर हेड उनका ही है। पत्र में उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। नीचे नाम लिखा गया है। उनका (नंदन सिंह का) न्यूरो का इलाज चल रहा है। पत्र गलत लिखा गया है, वह इसकी जांच करवा रहे हैं।

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